Monday, March 12, 2012

मै मर चुकी हूँ ....




शरीर को 
सूरज की तपिश 
झुलसा रही है ....
बनते हुए 
जख्मों से 
खून का रिसना 
बदस्तूर जारी है ....
कदम बढ़ना 
चाहते हैं ,
लेकिन -
चाहकर भी 
बढ़ नहीं पाते....

आह !
शरीर धराशायी हो गया ....
चेतना लुप्त  
हो रही है ....

अरे !
कुछ दिख रहा है ,
धुंधला सा -
वो कवच ही है ना
जो टूट कर
मिट्टी में मिल चुका है....
जीव दूर खड़ा 
मुस्करा रहा है ....

आह !
शायद -
मै मर  चुकी हूँ  ....
और -
दूर खड़े होकर 
समय की रास लीला 
देख रही हूँ ....
क्योकि -
अभी शरीर का 
मिट्टी में मिलना 
शेष है  .........!!!!!!!


प्रियंका राठौर 

17 comments:

  1. Amazing thought,jinhe aapne piroya hai,behad naazuk lafzo'n me'n......beautiful!!!!!!!!!!!!

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  2. दूर खड़े होकर
    समय की रास लीला
    देख रही हूँ ....
    क्योकि -
    अभी शरीर का
    मिट्टी में मिलना
    शेष है!!!!!!!
    बहुत बढ़िया प्रस्तुति,भावपूर्ण सुंदर रचना,...
    बहुत दिनों से पोस्ट पर आप नहीं आई,...आइये स्वागत है

    RESENT POST...काव्यान्जलि ...: बसंती रंग छा गया,...

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  3. शरीर की यही परिणिति है .... सुंदर अभिव्यक्ति

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  4. बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।

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  5. गहन भाव अभिव्यक्ति....

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  6. मिटटी का पुतला पड़ा, मिटटी से क्या मीत ।
    मूढ़मती पढ़ मर्सिया, चली आत्मा जीत ।|

    दिनेश की टिप्पणी : आपका लिंक
    dineshkidillagi.blogspot.com

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  7. मिट्टी को मिट्टी में मिलना ही होता है... गहन भाव...

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  8. क्योकि -
    अभी शरीर का
    मिट्टी में मिलना
    शेष है .........!!!!!!!
    .....बहुत खूब प्रियंका
    होली की सादर बधाईयाँ...
    जरूरी कार्यो के ब्लॉगजगत से दूर था
    आप तक बहुत दिनों के बाद आ सका हूँ

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  9. आत्मा देख रही है....क्या हाल है उस तन का, जिस पर तुम्हें इतना अभिमान था... था...
    सुन्दर रचना..

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  10. जीवन का अंतिम सत्य शायद यही है ...
    बहुत खूब ...

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  11. aahh kya likha hai...seedhe dil par asar karti hai....

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  12. दूर खड़े होकर
    समय की रास लीला
    देख रही हूँ ....
    क्योकि -
    अभी शरीर का
    मिट्टी में मिलना
    शेष है .........!!!!!!!
    ..yahi to shaswat satya hai..
    badiya lagi rachna aur chitra..

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  13. मौत कभी हश्र का मोहताज नहीं
    मौत आगाज़ है अंजाम नहीं
    आपका मेरे ब्लॉग पर स्वागत है
    माँ रचना पढ़ें विचारों का स्वागत .

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