Friday, May 13, 2011

दृढ़ इच्छाशक्ति

एक लघु बीज से विशालकाय वृक्ष का जन्म होता है। बीज-अंकुरित होने और विशालकाय वृक्ष का रूप धारण करने के पहले उसके बीज को धरती के भीतर गड़े रहना पड़ता है तब कहीं जाकर वह बीज वृक्ष के रूप में फिर से जीवन ग्रहण करता है अर्थात् एक प्रकार से उसे अपना अस्तित्व समाप्त करने के लिए तैयार रहना पड़ता है। हमारे सामान्य जीवन में भी यह अद्भुत लीला चलती रहती है। जीवन में छोटी-सी-छोटी सफलताओं का भी अर्थ है। प्रत्येक महान उपलब्धि के पीछे वश में की गईं जटिल कठिनाइयों, रौंदी हुई बाधाओं तथा दबाई गई आपदाओं का इतिहास छुपा रहता है।
जीवन एक खेल है। किसी भी खेल में जीत केवल एक पक्ष की होती है। खेल पूरी ईमानदारी के साथ खेला जाए, यह मुख्य शर्त है। इसके अतिरिक्त आदर्श खिलाड़ी का गुण होता है कि वह जीत-हार, दोनों दशाओं में खेल-भावना नहीं छोड़ता। जीतने वाला निष्कपट भाव से विजयश्री की प्राप्ति करे और पराजित खिलाड़ी अपनी पराजय से कुंठित न हो। यदि ऐसा नहीं हुआ तो खेल के परिणाम होंगे- प्रतिशोध, रोष तथा भ्रांति। कभी-कभी पराजय इतनी गंभीर होती है कि उसे स्वीकार कर पाना सहज नहीं होता। मानव-स्वभाव ही ऐसा है कि वह विजय के गर्व से झूम उठता है। चाहे वह सामान्य स्तर की ही विजय क्यों न हो, उसका प्रफुल्ल होना स्वाभाविक है। विजय ही सब कुछ नहीं है। ऐसा भी होता है कि पराजय से हम बहुत-कुछ सीखते हैं। खेल की भावना से हारने वाले मनुष्यों में से ही उत्कृष्ट विजेता निकलते हैं। जीवन में आपको कैसी भी विपत्तियों का सामना करना पड़े, उनसे विचलित नहीं होना चाहिए। खतरों को झेलने के लिए सदैव तत्पर रहें। अधिक संभावना यही है कि आप ही की विजय होगी। सफलता अर्जित करने का यह एकमात्र मार्ग है। सफलता का द्वार खोलने के लिए दो प्रकार की कुंजियों की आवश्यकता पड़ती है। पहली कुंजी है, दृढ़ इच्छाशक्ति और दूसरी है, कठोर श्रम-साधना। दृढ़ इच्छाशक्ति के बिना सफलता की कामना नहीं की जा सकती और कठोर श्रम-साधना के अभाव में विजयश्री अर्जित नहीं की जा सकती।




साभार - दैनिक जागरण

6 comments:

  1. सफलता का द्वार खोलने के लिए दो प्रकार की कुंजियों की आवश्यकता पड़ती है। पहली कुंजी है, दृढ़ इच्छाशक्ति और दूसरी है, कठोर श्रम-साधना। दृढ़ इच्छाशक्ति के बिना सफलता की कामना नहीं की जा सकती और कठोर श्रम-साधना के अभाव में विजयश्री अर्जित नहीं की जा सकती।
    ...यही सच है

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  2. badhiya lagaa padhkar! jeevan satya ko ingit kartaa lekh !

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  3. दृढ़ इच्छाशक्ति और कठोर श्रम-साधना.
    यही है सफलता की कुंजी .........

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  4. प्रिय प्रियंका
    ..... सुन्दर सन्देश देती

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