Sunday, November 6, 2011

दिल ......








डरता है दिल ,
फिर भी आगे ,
बढता है दिल ....
धोखे की चोट से ,
घबराता है दिल ,
पर ना जाने क्यों ,
ऐतबार कर जाता है दिल ....
धीमी धीमी सांसों से ,
चलता है दिल ,
बेचैनी के साथ भी -
आगे बढता है दिल ......


प्रियंका राठौर

21 comments:

  1. ऐतबार कर जाता है दिल ....
    धीमी धीमी सांसों से ,
    चलता है दिल ,
    बेचैनी के साथ भी -
    आगे बढता है दिल ......

    बहुत हि सुन्दर!
    मन के भावों को व्यक्ति करटी रचना!

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  2. दिल की बात निराली!

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  3. ये control से परे की बात है ...

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  4. आपके इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा आज दिनांक 07-11-2011 को सोमवासरीय चर्चा मंच पर भी होगी। सूचनार्थ

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  5. दिल के हांथों मजबूर लोग ...........सुंदर भाव अच्छी लगी

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  6. दिल की बातें दिल ही जाने...
    बढि़या कविता।

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  7. बढि़या कविता...
    सादर...

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  8. बहुत खूब प्रियंका जी ।

    सादर

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  9. dheere-dheere aur nikharegee kavitaa...shubhkamanaye priyanka. bajegaa tumhara bhi dankaa.

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  10. दिल तो है दिल दिल का ऐतबार क्या कीजे।

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  11. अच्छी रचना !

    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है,कृपया अपने महत्त्वपूर्ण विचारों से अवगत कराएँ ।
    http://poetry-kavita.blogspot.com/2011/11/blog-post_06.html

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  12. बढ़ने दो....!!दिल को...रोको न...

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  13. दिल की बातें दिल ही जाने. बढ़िया प्रस्तुति.

    बधाई.

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  14. दिल है कि मानता नहीं :-)और क्या कहूँ समय मिले कभी टु आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है

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  15. shayad isiliye iska naam dil rakha hoga kisi ne!!!!!!!!!!!!!!!!!

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