Tuesday, August 2, 2011

काश !





काश !
तुम भी वही होते
जो मै हूँ ....
जीते एक साथ
चलते एक साथ
सुख - दुःख बांटते एक साथ
लेकिन -
सब अलग है
टुकड़ों सा बँटा बँटा सा
नदी के दो किनारों की
तरह .....
जो क्षितिज पर
दिखते तो साथ हैं
पर बहुत दूर हैं .......

काश !
तुम भी वही होते
जो मै हूँ .....


प्रियंका राठौर

21 comments:

  1. काश !
    तुम भी वही होते
    जो मै हूँ .....

    बहुत बढ़िया।

    सादर

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  2. काश !
    तुम भी वही होते
    जो मै हूँ .....
    सुन्दर परिपक्व रचना, शायद सभी के दिलों की बात कह रही है

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  3. बहुत ही सुंदर रचना...

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  4. काश !
    तुम भी वही होते
    जो मै हूँ .....

    मैं तो बस इन्ही चार शब्दों में खोकर रह गया....

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  5. rishto ki sachchai banya kar diya aapne mam.,,,,,

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  6. काश !
    तुम भी वही होते

    very nice post , aabhaar

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  7. खूबसूरत भाव ..अच्छी प्रस्तुति

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  8. प्रियंका....सुन्दर भावों से पूर्ण रचना...पर,यह भी सत्य है...एक कटु सत्य जीवन का...कि कई बार दो लोग साथ तो होते हैं ...साथ चलते हैं...रेल की पटरियों की तरह ....."सेतु" हर पे संभव हैं...है न ?

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  9. खुद को तलाश लेने का सफ़र अभी जारी है ........

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  11. भिक्षाटन करता फिरे, परहित चर्चाकार |
    इक रचना पाई इधर, धन्य हुआ आभार ||

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  12. उफ्फ्फ !!!! ये काश भी न...
    बहुत ही सुन्दर कविता...

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  13. आपकी इस पोस्ट की हलचल आज यहाँ भी है

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  14. बेहद खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

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  15. bahut khoobsurat ,komal ahsaas dilati hui kavita.

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  16. बहुत बढ़िया...

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  17. बहुत देर से आपकी कविताये पढ़ रहा हूँ , आप बहुत अच्छा लिखती है , ये कविता " काश " दिल को छु गयी है ..
    आभार

    विजय

    कृपया मेरी नयी कविता " फूल, चाय और बारिश " को पढकर अपनी बहुमूल्य राय दिजियेंगा . लिंक है : http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/07/blog-post_22.html

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