Tuesday, August 23, 2011

मेरी बातें...मेरे शब्द ....





मेरी बातें
मेरे शब्द ......

क्या करूं
जब किसी के
अंतर्मन के
शांत जल में
पत्थर की भांति
गिरते ही
लहरें पैदा कर जाते हैं .......

मेरी बातें
मेरे शब्द .....

क्या करूं
जब किसी  के
अहसासों के
शांत समुन्दर में
चाँद की भांति
ज्वार भाटे पैदा कर जाते हैं ......

मेरी बातें
मेरे शब्द ....

ये तो हैं रोशनी
उस दीपक की
जो जाने वाले
को प्रणाम हैं ......
यह मद्धम तो है
पर अँधेरे से दूर है .....
खुशियों का सागर
तो नहीं
पर आस की डोर हैं .......

मेरी बातें
मेरे शब्द .....
क्या करूं
जब किसी की
आत्मा को ही
झिंझोर जाते हैं .......

मेरी बातें
मेरे शब्द .......




प्रियंका राठौर

23 comments:

  1. खुशियों का सागर
    तो नहीं
    पर आस की डोर हैं ..

    bahut khub .

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  2. ये तो हैं रोशनी
    उस दीपक की
    जो जाने वाले
    को प्रणाम हैं ......
    यह मद्धम तो है
    पर अँधेरे से दूर है .....
    खुशियों का सागर
    तो नहीं
    पर आस की डोर हैं .......

    वाह,इस अभिव्यक्ति का जवाब नहीं !
    आभार !

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  3. kabhi kabhi shabd lahren paida kar hi dete hai....

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  4. आपकी बाते आपके शब्द.... दोनों ही बहुत सुन्दर है....

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  5. यह मद्धम तो है
    पर अँधेरे से दूर है .....
    खुशियों का सागर
    तो नहीं
    पर आस की डोर हैं .......

    बहुत सुन्दर..

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  6. बहुत सारगर्भित रचना।
    शब्दों का असर बहुत ज्यादा होता है।

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  7. क्या करूं
    जब किसी के
    अंतर्मन के
    शांत जल में
    पत्थर की भांति
    गिरते ही
    लहरें पैदा कर जाते हैं ...
    pahli bar aapke blog par aaee .....bahut hi bhavpoorna rachna. aapka abhar.

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  8. शांत जल में
    पत्थर की भांति
    गिरते ही
    bahut gahan bhavon ko abhivyakt kiya hai aapne .aabhar

    BHARTIY NARI

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  9. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

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  10. पर अँधेरे से दूर है .....
    खुशियों का सागर
    तो नहीं
    पर आस की डोर हैं .......
    अति संवेदनशील प्रभावी सृजन ....... दिल को छूती हुयी .... शुक्रिया जी /

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  11. बहुत सुन्दर

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  12. शब्दों का खूबसूरत एहसास

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  13. ये अहसास ही बहुत है कि किसी की आत्मा को भी झिंझोर सकते हैं ...

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  14. ये तो हैं रोशनी
    उस दीपक की
    जो जाने वाले
    को प्रणाम हैं ......
    यह मद्धम तो है
    पर अँधेरे से दूर है .....
    खुशियों का सागर
    तो नहीं
    पर आस की डोर हैं .......
    बहुत बढ़िया |
    कृपया मेरी भी रचना देखें और ब्लॉग अच्छा लगे तो फोलो करें |
    सुनो ऐ सरकार !!
    और इस नए ब्लॉग पे भी आयें और फोलो करें |
    काव्य का संसार

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  15. यह मद्धम तो है
    पर अँधेरे से दूर है .....
    खुशियों का सागर
    तो नहीं
    पर आस की डोर हैं .......

    मेरी बातें
    मेरे शब्द .....

    सुन्दर कविता...
    सादर बधाई...

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  16. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच

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  17. यह मद्धम तो है
    पर अँधेरे से दूर है .....
    खुशियों का सागर
    तो नहीं
    पर आस की डोर हैं .......
    बेहद सुंदर बातें और शब्द भी ।

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  18. बहुत ही सुन्दर भावों को अपने में समेटे शानदार कविता.

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