Friday, October 22, 2010

चाँद पे दाग है ....





चाँद पे दाग है .....
सुहागिन का श्रंगार है ,
प्रियतम का इंतजार है ,
माँ का लाल है ,
फिर भी -
चाँद पे दाग है .....
आसमान का ताज है ,
अँधेरे की आस है ,
चकोर की प्यास है ,
फिर भी -
चाँद पे दाग है .....!!



प्रियंका राठौर


3 comments:

  1. good thougts..keep writting...

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  2. सुंदर शब्दों के साथ.... बहुत सुंदर अभिव्यक्ति....

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