Friday, October 8, 2010

आस







दूर जाने की कोशिश
तेरे और करीब ले आती है ,
पत्थर बनने की कोशिश
पानी बन बह जाती है !
तेरे होने के अहसास से
जीवन में आस जुडती जाती है ,
इस कारण -
दूर जाने की कोशिश
बेकार ही हो जाती है ................




प्रियंका राठौर 

5 comments:

  1. कविता...शब्दों को चुन-चुन कर तराशा है आपने ...प्रशंसनीय रचना।

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  2. कल 10/10/2011 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  3. वाह! बहुत सुन्दर...
    सादर...

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